पवित्र नगर क़ुम में धार्मिक शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र और समस्त धार्मिक शिक्षा केन्द्रों के प्रमुख आयतुल्लाह आराफ़ी ने अंतर्राष्ट्रीय बैतुल मुक़द्दस आन लाइन कांफ़्रेंस के पहले दिन के सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान आज इस्लामी जगत के एक महत्वपूर्ण और अहम देश के रूप में अमरीका और अंतर्राष्ट्रीय ज़ायोनिज़्म की वर्चस्ववादी नीतियों और षड्यंत्रों के मुक़ाबले में प्रतिरोध के मोर्चे में अग्रणी है।
उन्होंने बल दिया कि इस्लामी धरती के चप्पे चप्पे की स्वतंत्रता तक जिनमें बैतुल मुक़द्दस सर्वोपरि है, प्रतिरोध आंदोलन का समर्थन जारी रहेगा।
अंतर्राष्ट्रीय बैतुल मुक़द्दस कांफ़्रेंस के चेयरमैन ने इस्राईल के मुक़ाबले में समस्त धार्मिक और जातीय मतभेदों से दूरी और पूर्णरूप से एकजुट हो जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
आयतुल्लाह आराफ़ीने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ को चाहिए कि प्रतिरोध के मोर्चे और फ़िलिस्तीनी राष्ट्र द्वारा अपने भविष्य निर्धारण के लिए रिफ़्रेंडम के आयोजन के हक़ को स्वीकार करे और इस संबंध में अपनी सारी कोशिशें अंजाम दे।